गायबियों का खेल



प्रस्तावना

शहर अल्मोरा अपनी शांति और पहाड़ी हवाओं के लिए जाना जाता था। यहाँ लोग आराम से जीते, सुबह की चाय की महक गलियों में फैलती और शाम को धुंधलका हर घर को रहस्य से भर देता। लेकिन इस शहर में एक दिन ऐसी घटना घटने वाली थी जो आने वाले दशकों तक लोगों को सोने नहीं देगी।

रात के 12 बजे, शहर के बीचों-बीच स्थित पुरानी राजा की हवेली पर एक अजीब सी रोशनी चमकी। लोगों ने सोचा शायद कोई आतिशबाज़ी है या बिजली का खेल, लेकिन जब सुबह अख़बार में खबर आई—

“हवेली पर दिखी रहस्यमयी लाइट्स, लोगों का दावा—यह खेल की शुरुआत है!”

तो शहर में सनसनी फैल गई।



पहला अध्याय – अजनबी

अगली ही शाम, हवेली के सामने पाँच अजनबी खड़े मिले। वे पाँचों बिल्कुल अलग थे—


1. काला सूट पहने आदमी – उसकी आँखों में ठंडापन था, जैसे वह किसी रहस्यमयी आदेश पर आया हो।


2. एक औरत, लाल साड़ी में, जिसकी उम्र 35 के आसपास थी लेकिन चेहरा एकदम निर्विकार।


3. दो लड़के, दिखने में कॉलेज के स्टूडेंट, मगर आँखों में डर और उत्सुकता दोनों।


4. एक बुज़ुर्ग, हाथ में एक लोहे की छड़ी लिए, मानो उसे सब पता हो कि क्या होने वाला है।


शहर के लोग हैरान थे। तभी काले सूट वाला आदमी बोला—

“ये शहर चुना गया है। यहाँ एक खेल शुरू होगा। जो इसे खेलेगा, उसे मुक्ति मिलेगी। जो नहीं खेलेगा… वह हमेशा के लिए गुमनाम हो जाएगा।”

लोग इसे मज़ाक समझकर हँसने लगे। लेकिन तभी उस आदमी ने हाथ हिलाया और सामने खड़ा एक राहगीर अचानक गायब हो गया।



दूसरा अध्याय – खेल की घोषणा

उस रात हवेली के दरवाज़े खुले और अंदर से एक आवाज़ आई—

“स्वागत है। खेल शुरू होगा। पहले राउंड के लिए 10 प्रतिभागी चुन लिए गए हैं।”

शहर के बीचों-बीच अचानक एक स्क्रीन उभरी, जैसे हवा में तैर रही हो। स्क्रीन पर 10 नाम चमक उठे। ये वही लोग थे जिन्होंने सबसे पहले हवेली के पास जाने की कोशिश की थी।

नाम पढ़ते ही वे लोग ज़बरदस्ती हवेली की ओर खिंचने लगे, मानो कोई अदृश्य ताक़त उन्हें अंदर खींच रही हो।



तीसरा अध्याय – पहला स्तर

हवेली के भीतर घुप्प अंधेरा था। चारों ओर सिर्फ़ दीवारों पर लिखे अजीब चिह्न और बीच में रखी एक पुरानी घड़ी।

घड़ी ने कहा—

“पहला खेल है—समय से भागना। तुम सबके सामने चार दरवाज़े हैं। सही दरवाज़ा चुनो, वरना तुम समय के लूप में फँस जाओगे।”

प्रतिभागी एक-एक करके दरवाज़े की ओर बढ़े।

पहले ने दाईं ओर का दरवाज़ा चुना और गायब हो गया।

दूसरे ने बाएँ वाला खोला तो अंदर से हज़ारों घड़ियों की टिक-टिक की आवाज़ आई और वह वहीं जड़ हो गया।

तीसरे ने बीच वाला खोला—वह ज़िंदा बच गया और अगले कमरे में पहुँच गया।

हर गलत दरवाज़ा चुनने वाला व्यक्ति या तो वहीं जमकर मूर्ति बन गया या फिर धुंध में विलीन हो गया।

पहले ही स्तर में 10 में से सिर्फ़ 4 लोग बचे।



चौथा अध्याय – दूसरा स्तर

अब वे चार लोग एक विशाल हॉल में पहुँचे। यहाँ चारों ओर आईने लगे थे। हर आईने में उनका अलग-अलग रूप दिखाई देता—

कहीं वे बूढ़े दिखते, कहीं बच्चे, कहीं खून से लथपथ।

आईनों की आवाज़ गूँजी—

“खुद को पहचानो। असली आईना चुनो, वरना तुम्हारा असली अस्तित्व यहीं खो जाएगा।”

सब डर गए। एक युवक ने जल्दबाज़ी में आईने को छुआ और तुरंत गायब हो गया, उसके कपड़े ज़मीन पर गिर पड़े।

बाकी तीन ने ध्यान से देखा और उस आईने को चुना जिसमें उनकी आँखें बिल्कुल वैसी थीं जैसी हकीकत में।

वे अगले स्तर में पहुँच गए।



पाँचवाँ अध्याय – तीसरा स्तर

अब बची तीन आत्माएँ। उन्हें एक काले कमरे में ले जाया गया जहाँ बीच में एक शतरंज की बिसात रखी थी। लेकिन यह बिसात साधारण नहीं थी।

हर चाल पर ज़मीन काँपती और किसी के शरीर से जीवन खिंचता महसूस होता।

आवाज़ आई—

“आख़िरी स्तर। जीतने वाला ज़िंदा शहर लौटेगा। हारने वाले इस हवेली की छाया बन जाएँगे।”

तीनों ने खेलना शुरू किया।

पहला खिलाड़ी हर चाल के साथ कमजोर होता चला गया और अंत में ज़मीन पर गिर पड़ा—उसकी परछाई बिसात में कैद हो गई।

दूसरी महिला ने चतुराई से खेला लेकिन एक ग़लत चाल ने उसे हमेशा के लिए काले खाने में धँसा दिया।

सिर्फ़ एक लड़का बचा। उसने जीत हासिल की।

जैसे ही उसने आख़िरी चाल चली, हवेली की दीवारें हिल गईं और दरवाज़े खुल गए।



छठा अध्याय – वापसी

सुबह शहर में लोगों ने देखा कि सिर्फ़ एक युवक हवेली से बाहर निकला। उसका चेहरा थका हुआ था, आँखों में डर और ग़म दोनों।

लोगों ने उससे पूछा कि बाक़ी कहाँ हैं। वह बस इतना बोला—

“वे अब कभी वापस नहीं आएँगे। खेल उन्हें ले चुका है।”

काले सूट वाला आदमी फिर दिखाई दिया और बोला—

“यह खेल कभी ख़त्म नहीं होता। हर शहर, हर जगह इसे खेलना होगा। याद रखो—खेल से भागने वाला, जीवन से भी भाग जाता है।”

इतना कहकर वह भी धुंध में गायब हो गया।



उपसंहार

आज भी अल्मोरा की उस हवेली को “गायबियों का खेल” कहा जाता है।

रात के सन्नाटे में लोग कहते हैं कि वहाँ 

से हँसी और चीखें सुनाई देती हैं।

कुछ कहते हैं कि जीतने वाला लड़का आज भी डर के साये में जी रहा है—क्योंकि खेल ने उसे चुना है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ