सूरज की पहली किरण उस टापू पर सालों बाद पड़ी थी। धुंध हट चुकी थी। हवेली की दीवारें अब र…
🌊 प्रस्तावना: रात जो कभी ख़त्म नहीं होती टापू पर अब कोई सामान्य रात नहीं थी। अंधेरा ग…
रात अब पहले जैसी नहीं रही थी। हवेली की खिड़कियों से खून की बूंदें टपक रही थीं। हवा में…
रात का आसमान लाल था — जैसे किसी ने उसे खून से रंग दिया हो। हवेली के ऊपर मंडराता धुंध क…
1. मौत के बाद की हँसी कबीर के गिरने के बाद हवेली कुछ देर तक शांत रही। लेकिन अचानक, हवे…
1. डर और शक की रात हवेली अब मौत की गिनती कर रही थी। पाँच लोग बचे थे—मनोज, सोनल, शिवानी…
टापू की हवेली अब सबके लिए मौत का जाल बन चुकी थी। हर बीतते घंटे उनके बीच से कोई न कोई ग…
डर का साया सोनाली की मौत ने सबको भीतर तक हिला दिया। अब हवेली का हर कोना मौत की आहट जै…
हवेली का स्वागत दसों लोग उस हवेली में कदम रखते ही सिहर उठे। अंदर घुप्प अंधेरा था। बस द…
बारिश की हल्की बूँदें शहर की सड़कों को भिगो रही थीं। हर गली, हर नुक्कड़ पर चर्चा सिर्फ…
1. सन्नाटे का बोझ हवेली के भीतर का सन्नाटा और भी भारी होता जा रहा था। अयान और रिया के …
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