अंधेरों का श्राप Part 2 – “फुसफुसाती दीवारें”

1. सन्नाटे का बोझ

हवेली के भीतर का सन्नाटा और भी भारी होता जा रहा था।

अयान और रिया के कदम जैसे ही लकड़ी की फर्श पर पड़ते, आवाज़ पूरे घर में गूँज उठती।

रिया ने धीमे स्वर में कहा—

“ये आवाज़… जैसे हवेली खुद हमारी मौजूदगी दर्ज कर रही हो।”


अयान ने कैमरा चालू किया, उसके लेंस में अंधेरे के बीच केवल टॉर्च की रोशनी काँपती दिख रही थी।

रिया, ये हमारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा शूट होगा।”


रिया ने गुस्से में उसे देखा।

“ये मज़ाक नहीं है अयान। मुझे लग रहा है जैसे कोई हमें देख रहा है।”


अचानक पास की दीवार से खर्र… खर्र… जैसी आवाज़ आई।

मानो कोई अंदर से नाखून घसीट रहा हो।

दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा और पसीने से भीग गए।


2. लाल दरवाज़ा

गलियारे के आखिर में खड़ा लाल निशानों वाला दरवाज़ा अजीब-सा खिंचाव पैदा कर रहा था।

रिया पीछे हटना चाहती थी, मगर अयान धीरे-धीरे उसी की ओर बढ़ रहा था।


दरवाज़े पर हल्के से हाथ रखते ही उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने उसकी हथेली पकड़ ली हो।

उसने झटके से हाथ खींचा।

रिया चिल्लाई—

“क्या हुआ?”


अयान काँपते हुए बोला—

“किसी ने… किसी ने मेरा हाथ पकड़ा था।”


दरवाज़ा अब खुद-ब-खुद कर्ररररर… की आवाज़ के साथ धीरे-धीरे खुलने लगा।

अंदर अँधेरा था, मगर उसमें से ठंडी हवा का तेज़ झोंका निकला।


3. डायरी का पहला पन्ना

कमरे के बीचों-बीच एक टूटी मेज़ थी, जिस पर वही पुरानी डायरी रखी थी जो उन्होंने पहले देखी थी।

लेकिन इस बार वो खुली हुई थी।


पन्ने पर लिखा था—

 “हमने सोचा था कि हवेली हमें हमेशा शरण देगी।

लेकिन इस घर की दीवारें सांस लेती हैं।

ये हमारी बातें सुनती हैं,

और फिर हमें निगल जाती हैं।”


रिया काँप गई।

“ये किसने लिखा होगा?”


अयान ने पन्ना पलटा।

अगले पन्ने पर एक तारीख़ लिखी थी—

14 जुलाई 1923”।


उसके नीचे लिखा था—


“आज रात हवेली ने पहला खून माँगा।”


रिया ने डायरी झटके से बंद कर दी।

“बस! अब हमें यहाँ से निकलना होगा।”


लेकिन तभी पीछे से वही परछाई दिखी।

धीरे-धीरे, दरवाज़े की चौखट पर खड़ी।

इस बार उसकी आँखें और भी चमकदार लाल थीं।


4. हवेली का खेल

अयान ने टॉर्च सीधा परछाई की ओर डाली।

लेकिन जैसे ही रोशनी उस पर पड़ी, परछाई धुएँ में बदलकर गायब हो गई।

मगर अगले ही पल वो रिया के पीछे खड़ी थी।

रिया ने अपने कंधे पर किसी ठंडी साँस का एहसास किया।

उसने चीखते हुए पलटकर देखा—

वहाँ कुछ नहीं था।


लेकिन फर्श पर गीले पैरों के निशान उभर आए थे, जो कमरे के बीच तक जा रहे थे।

धीरे-धीरे, उन पैरों के निशान गायब होने लगे।


अयान ने काँपते हुए कहा—

“ये जगह… हमें अपने खेल में उलझा रही है।”


5. पहला शिकार

रिया अचानक चुप हो गई।

उसकी आँखें दीवार की ओर टिकी थीं।

अयान ने मुड़कर देखा—

दीवार पर उनका ही नाम लिखा था, ताज़ा खून से।


 “अयान”

“रिया”


अयान का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“ये… ये नाम यहाँ कैसे?”


अचानक टॉर्च बंद हो गई।

चारों तरफ़ घुप्प अंधेरा छा गया।


अंधेरे में सिर्फ़ एक आवाज़ गूँजी—

“एक को रहना होगा…”

                                            To be continue.....

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