✦ रहस्यमयी टापू – भाग 6असली खेल की शुरुआत



1. मौत के बाद की हँसी

कबीर के गिरने के बाद हवेली कुछ देर तक शांत रही।

लेकिन अचानक, हवेली की दीवारों से गूँजती हुई हँसी सुनाई दी।

वह हँसी कबीर की नहीं थी… यह किसी और की थी, और इतनी गहरी थी कि सबकी रूह काँप उठी।


मनोज काँपते हुए बोला –

“अगर कबीर मर गया तो… फिर ये हँसी किसकी है?”


2. हवेली का नया चेहरा

अब हवेली के कमरे बदलने लगे। दीवारें हिलने लगीं, दरवाज़े खुद-ब-खुद खुलने-बंद होने लगे।

सोनल ने महसूस किया कि पूरा महल जैसे जिंदा हो।

एक लंबा गलियारा खुला, जिस पर ख़ून से लिखा था –

“अब खेल असली रूप में शुरू हुआ है।”


3. शिवानी का गायब होना

तीनों ने गलियारे में कदम रखा, तभी अचानक शिवानी चीख़ पड़ी और फर्श उसके पैरों के नीचे से टूट गया।

वह अंधेरे में गिर गई।

उसकी चीख़ धीरे-धीरे गूंजती रही… और फिर सन्नाटा।


अब सिर्फ दो बचे थे – मनोज और सोनल


4. मास्टर ऑफ़ गेम

अचानक हवेली के मुख्य हॉल में एक विशाल कुर्सी पर परछाई नज़र आई।

उस पर एक नकाबपोश इंसान बैठा था।

वह भारी आवाज़ में बोला –

“तुम सोचते हो कि कातिल कबीर था? नहीं… वो तो मेरे खेल का मोहरा था।”


सोनल ने काँपते हुए पूछा –

“तो तू कौन है?”


वह हँसा –

“मैं इस हवेली का मालिक हूँ… इस टापू का शैतान… और ये खेल मैंने हजारों बार खेला है। हर बार लोग आते हैं, मरते हैं और हवेली मेरी प्यास बुझाती है।”


5. हवेली की आत्मा का सच

नकाबपोश ने अपने चेहरे से नकाब हटाया।

वह एक बूढ़ा आदमी था जिसकी आँखों में अजीब पागलपन झलक रहा था।

वह बोला –

“ये हवेली मेरे पूर्वजों की है। उन्होंने इसे बलि की जगह बनाया था। हर दस साल में नए शिकार यहाँ आते हैं… और उनकी आत्माओं से हवेली ज़िंदा रहती है।”


मनोज ने चिल्लाते हुए कहा –

“तो तू ही असली शैतान है!”


6. आखिरी चुनौती

बूढ़े शैतान ने कहा –

“हाँ… लेकिन बचने का रास्ता है। तुम्हें मेरा आखिरी खेल जीतना होगा।

इस हवेली में दो दरवाज़े हैं – एक तुम्हें आज़ादी देगा और दूसरा तुम्हें हमेशा के लिए कैद कर देगा।”


सोनल ने मनोज की ओर देखा।

दोनों समझ गए कि अब यह मौत और ज़िंदगी का खेल है।



🔥 भाग 6 का अंत

दो दरवाज़े… एक मौत, एक मुक्ति।

कौन सही दरवाज़ा चुनेगा?

और क्या सच में हवेली से बाहर निकलना संभव है, या यह खेल कभी खत्म ही नहीं होगा?

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