✦ रहस्यमयी टापू – भाग 1 लॉटरी का खेल और सफर की शुरुआत

बारिश की हल्की बूँदें शहर की सड़कों को भिगो रही थीं। हर गली, हर नुक्कड़ पर चर्चा सिर्फ़ एक ही चीज़ की थी—

"दस लोगों की ज़िंदगी बदलने वाली लॉटरी"।

यह लॉटरी किसी साधारण इनाम की नहीं थी। यह थी, एक रहस्यमयी संस्था द्वारा आयोजित प्रतियोगिता, जिसमें जीतने वालों को "एक सपनों का सफर" उपहार में मिलता था। कहा गया था कि विजेताओं को एक अज्ञात शहर की सैर कराई जाएगी, जहाँ ऐश्वर्य, रोमांच और रहस्य उनका इंतज़ार कर रहे हैं।


लोगों में हलचल थी, पर साथ ही डर भी। क्योंकि इस संस्था के बारे में कोई ज़्यादा कुछ नहीं जानता था। लेकिन इनाम का लालच इतना बड़ा था कि कोई भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था।



दस लोग, दस किस्मतें

ड्रॉ के बाद चुने गए 10 लोगों के नाम घोषित किए गए। भीड़ तालियों और सीटी से गूंज उठी।


1. अमृता सेन – एक युवा पत्रकार, तेज दिमाग़ और सच्चाई की खोज में हमेशा आगे।


2. विक्रम मल्होत्रा – एक बिज़नेसमैन, पैसे का भूखा और महत्वाकांक्षी।


3. राघव वर्मा – एक कॉलेज प्रोफ़ेसर, किताबों में खोया रहने वाला, लेकिन गहरी सोच वाला इंसान।


4. सोनाली सिंह – फैशन मॉडल, शोहरत और चमक-दमक की दीवानी।


5. जयदीप – पुलिस इंस्पेक्टर, कड़क स्वभाव वाला और नियमों का पक्का।


6. कविता गुप्ता – एक गृहिणी, साधारण लेकिन भावुक और धार्मिक स्वभाव की।


7. नितिन – एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, शांत स्वभाव का, पर तकनीक में माहिर।


8. अनन्या – एक मेडिकल स्टूडेंट, संवेदनशील और निडर।


9. कबीर – एक फ्रीलांस फोटोग्राफर, adventurous और रहस्यमय जगहों का शौक़ीन।


10. राजीव – एक बेरोज़गार नौजवान, जिसकी आँखों में बस अमीर बनने का ख्वाब था।



ये दस लोग अलग-अलग ज़िंदगियों से थे, पर अब उनका सफर एक ही था।



सपनों का सफर या मौत का बुलावा?

हवेली जैसी दिखने वाली संस्था की इमारत से उन्हें बुलावा आया। वहाँ उन्हें बताया गया कि उन्हें एक निजी जहाज़ (प्राइवेट प्लेन) से उस रहस्यमयी शहर तक पहुँचाया जाएगा।


रात के अंधेरे में, सभी लोग अपने-अपने सूटकेस लेकर एयरस्ट्रिप पर पहुँचे। प्लेन सफेद रंग का था, जिस पर कोई नाम या निशान नहीं था। बस एक अजीब सा लोगो बना था—एक बंद ताला।


सबके मन में सवाल थे—

"क्यों हमें चुना गया? क्यों ये शहर गुप्त है? और क्यों इतनी रहस्यमयी तैयारी है?"

पर किसी ने ज़ोर से कुछ नहीं कहा।



हवाओं में उड़ता प्लेन और बेचैनी

प्लेन उड़ान भर चुका था। अंदर का माहौल शानदार था। आरामदायक सीटें, रंगीन रोशनी, और सामने स्क्रीन पर एक वीडियो चल रहा था—

"आप सभी का स्वागत है। यह सफर आपको ऐसी दुनिया में ले जाएगा जिसे आपने कभी नहीं देखा होगा।"


पर अमृता ने गौर किया कि उस वीडियो में दिखाई देने वाले चेहरे सब नकाबपोश थे।

उसकी पत्रकार वाली प्रवृत्ति जागी। उसने अपने कैमरे से वो फुटेज रिकॉर्ड कर ली।


विक्रम ने मजाक में कहा –

“भई, अगर ये सफर इतना रहस्यमयी है, तो कहीं ये हनीमून प्लान तो नहीं?”

सब हँस दिए, लेकिन जयदीप (पुलिस इंस्पेक्टर) का चेहरा गंभीर रहा।

“मुझे ये सब कुछ गड़बड़ लग रहा है। बिना पहचान के संस्था, बिना मंज़िल बताए सफर... इसमें ज़रूर राज़ छिपा है।”



पहला डर

कुछ घंटे बाद, अचानक प्लेन ज़ोर से हिलने लगा। खिड़कियों से बाहर देखा तो घने बादल और बिजली की चमक दिखाई दी।


“ये... ये मौसम अचानक कैसे बिगड़ गया?” – अनन्या ने घबराकर कहा।


कैप्टन की आवाज़ स्पीकर पर आई –

“कृपया सीट बेल्ट बाँध लें, हमें थोड़ी हलचल का सामना करना पड़ रहा है।”


लेकिन कुछ ही पलों में हलचल तूफ़ान में बदल गई।

प्लेन तेजी से नीचे गिरने लगा। चीखें गूँज उठीं।

अमृता ने कैमरे को कसकर पकड़ा, जैसे उसे एहसास था कि यही आगे उसकी सबसे बड़ी गवाही बनेगी।



सपनों का अंत, टापू की शुरुआत 

प्लेन एक जोरदार धमाके के साथ समुद्र में नहीं, बल्कि एक अजीब सी जगह पर गिरा।

सारे लोग बेहोश हो गए।


जब होश आया तो सबने खुद को रेत पर पाया। उनके चारों ओर ऊँचे पेड़, घना जंगल और दूर से उठती समुद्री लहरें थीं।


“हम कहाँ हैं?” – सोनाली ने चिल्लाकर कहा।

नितिन ने अपने जीपीएस को ऑन करने की कोशिश की, लेकिन उसमें कोई सिग्नल नहीं था।


जयदीप ने चारों ओर नज़र डाली –

“ये कोई अनजान टापू है। और हमें यहाँ जानबूझकर लाया गया है।”



हवेली का पहला दीदार

दूर, जंगल के बीचो-बीच, उन्हें एक विशाल काली हवेली दिखाई दी।

विक्रम बोला –

“शायद वहाँ मदद मिले। चलो।”


पर जैसे-जैसे वे हवेली के पास पहुँचे, एक सिहरन उनके शरीर में दौड़ गई।

दीवारों पर बेलें चढ़ी थीं, दरवाज़े पर ज़ंग लगा था, और ऊपर की खिड़कियों से अजीब सी परछाइयाँ झलक रही थीं।


हवेली का दरवाज़ा अपने आप चरमराते हुए खुला।

भीतर से अंधेरा और सन्नाटा—लेकिन ऐसा लगा जैसे कोई उनका इंतज़ार कर रहा हो।



✨ भाग 1 का अंत –

अब खेल शुरू हो चुका था। दस लोगों की ज़िंदगियाँ इस हवेली और टापू से बँध 

चुकी थीं।

लेकिन उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि आने वाले दिनों में हर रात एक कत्ल होगा... और उनमें से कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।

           

                                            Wait for next...

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