✦ रहस्यमयी टापू –भाग 4 – हवेली की फुसफुसाहटें

टापू की हवेली अब सबके लिए मौत का जाल बन चुकी थी। हर बीतते घंटे उनके बीच से कोई न कोई गायब हो रहा था, और अब सभी के दिलों में सिर्फ एक सवाल था—“अगला कौन?”



1. हवेली की दीवारें जो सांस लेती थीं

रात गहराते ही हवेली में अजीब आवाज़ें गूँजने लगीं। कभी ऐसा लगता जैसे दीवारें कराह रही हों, कभी ऐसा जैसे कोई उनमें से हँस रहा हो। हर कोने से ठंडी हवा बह रही थी।

मीनाक्षी ने काँपते हुए कहा –

“ये हवेली जिंदा है… हमें यहाँ से निकलना ही होगा।”

लेकिन सवाल ये था कि निकले कैसे? क्योंकि चारों तरफ सिर्फ घना जंगल और समुद्र था। और हवेली का दरवाज़ा… वो तो अपने आप ही बंद हो चुका था।



2. खून से लिखा नक्शा

सुबह सबको हवेली के हॉल में दीवार पर एक नया निशान दिखाई दिया। ख़ून से बना नक्शा।

उस नक्शे में हवेली के नीचे तहखाने का रास्ता दिखाया गया था। लेकिन उसके नीचे लिखा था –

“जो अंदर जाएगा, वही अगला शिकार बनेगा।”

काफी बहस के बाद सबने तय किया कि बिना तहखाने के सच पता लगाए, यहाँ से निकलना नामुमकिन है।



3. तहखाने का दरवाज़ा और खौफनाक खिलौने

लाइब्रेरी में बुकशेल्फ़ हटाते ही तहखाने का दरवाज़ा मिला। दरवाज़ा खोलते ही एक सड़ी-गली बदबू ने सबका गला घोंट दिया।

अंदर की दीवारों पर पुराने खिलौने लटके हुए थे – गुड़िया, लकड़ी के घोड़े, मुखौटे, और सबके चेहरे खून से सने हुए।


अचानक एक गुड़िया ज़मीन पर गिरी और उसमें से बच्चों की हँसी गूँजने लगी।

मनोज घबराकर चिल्लाया –

“ये… ये जगह इंसानों की नहीं है।”



4. दीवार का शिकार

जैसे ही सब तहखाने में उतरे, दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। अचानक दीवारों से सिसकियों जैसी आवाज़ आने लगी।

अर्जुन ने टॉर्च की रोशनी से दीवार देखी और बोला –

“ये दीवार… जैसे हिल रही है।”

उसी पल दीवार ने उसे पकड़ लिया और धीरे-धीरे अपने अंदर खींच लिया।

अर्जुन की चीख पूरे तहखाने में गूँज उठी।

कुछ ही देर बाद दीवार से खून रिसने लगा और लाल अक्षरों में लिखा उभर आया –

“एक और चला गया।”


अब उनकी गिनती घटकर सात से छः हो चुकी थी।



5. हवेली की औरत

रात होते ही सबने हवेली के हॉल में एक सफेद साड़ी वाली औरत को देखा। उसके कदमों के नीचे खून के निशान थे और उसका चेहरा आधा जला हुआ था।

वह सबकी तरफ बढ़ी और खौफनाक आवाज़ में बोली –

“ये हवेली मेरी है… तुम सब मेरे कैदी हो।”


उसने ज़मीन पर अपनी उँगली से एक चक्र बनाया। चक्र से आग उठी और उसमें एक-एक कर सभी के चेहरे दिखाई दिए। लेकिन उनमें से एक का चेहरा धुंधला था।

वह बोली –

“हत्यारा तुम्हारे बीच ही है।”



6. शक और टूटता विश्वास

अब सब एक-दूसरे पर शक करने लगे।

शिवानी को लगने लगा कि मनोज ही कातिल है क्योंकि वो बार-बार कहता था कि तहखाने मत चलो।


मनोज को लगा कि सोनल ही दोषी है क्योंकि हर बार कत्ल के समय वो गायब हो जाती थी।


मीनाक्षी ने कहा कि “ये सब हवेली का खेल है, असली हत्यारा हमें खुद से लड़ा रहा है।”

विश्वास टूट चुका था। अब हर कोई हर किसी से डर रहा था।



7. गुप्त कमरा और खून से लिखी डायरी

अगले दिन सोनल को हवेली के एक कोने में छुपा हुआ कमरा मिला। वहाँ एक पुरानी डायरी रखी थी। डायरी में लिखा था –


"इस हवेली का मालिक कभी खिलौनों का शौकीन था। लेकिन उसकी पत्नी और बच्चा रहस्यमय हालातों में मारे गए। तभी से उसने कसम खाई कि जो भी यहाँ आएगा, वो कभी जिंदा बाहर नहीं जाएगा। हर मौत उसके खिलौनों का हिस्सा बन जाएगी।”


डायरी पढ़ते ही सबको एहसास हुआ कि हवेली सिर्फ एक खंडहर नहीं… बल्कि मौत का कारखाना है।



8. रात की मौत और दीवार पर सच

रात होते ही फिर से एक कत्ल हुआ। इस बार मीनाक्षी गायब हो गई। सुबह उसकी लाश हवेली के झूमर से लटकती मिली।

दीवार पर ख़ून से लिखा था –

“अब तुम पाँच बचे हो। असली खेल अभी शुरू हुआ है।”



9. हवेली का सच – कातिल उनके बीच

अब सबको समझ आया कि हवेली का भूत सिर्फ एक हिस्सा है, लेकिन असली खेल तो कोई इंसान खेल रहा है।

दीवार पर फिर से शब्द उभरे –

“कत्ल करने वाला कोई और नहीं, बल्कि तुम्हारे बीच ही छिपा है।”

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